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शत्रु वशीकरण मंत्र टोटके प्रयोग | +91-9950420009

यदि कोई शत्रु से परेशान है तो शत्रु वशीकरण मंत्र टोटके प्रयोग उपाय को प्राप्त कर शत्रु बाधा से छुटकारा पाना चाहते है तो शत्रु वशीकरण मंत्र तंत्र का प्रयोग कर इसका समाधान प्राप्त किया जा सकता है | वशीकरण एक अनोखी और अचूक असर वाली विद्या है। इससे कई कार्य भलीभांति संपन्न किए जा सकते हैं। कार्यक्षेत्र की बाधाएं दूर की जा सकती हैं। मनोवांछित परिणाम के लिए लक्ष्य की प्राप्ति को संभव बनाया जा सकता है। क्योंकि इसके प्रयोग से न केवल आपके भीतर आत्मविश्वास मजबूत होगा, बल्कि व्यक्तित्व में गजब का निखार आ जाएगा।

शत्रु वशीकरण मंत्र टोटके प्रयोग

किसी का सामना करना हो, किसी के समक्ष अपनी बात रखनी हो, किसी को अपनी बात मनवानी हो, या सामने वाले को कमजोर बनाना हो, तो इसमें वशीकरण के विविध उपायों को अपनाया जा सकता है। खासकर तब जब आप शत्रुओं से तंग आ चुके हों। वशीकरण के उपायों से ही नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों के रूख को विपरीत दिशा में ले जाया जा सकता है। बड़ा से बड़ा, या कहें खरतनाक दुश्मन तक का विनाश किया जा सकता है। वशीकरण करने के कई तरीके बताए गए हैं, जिनमें कुछ मंत्रों के जाप के प्रयोग हैं, तो कुछ के लिए धार्मिक या तांत्रिक अनुष्ठा के द्वारा सिद्धि-साधना तक की जाती है। वैसे शत्रु को टोने-टोटके से भी वशीभूत किया जा सकता है।

शत्रुनाशक मंत्र

नीचे दिए गए मंत्र का प्रतिदिन सूर्योदय से पहले जाप करने से शत्रु का नाश होता है या फिर शत्रुता मित्रता में बदल जाती है। यह मंत्र बार-बार परेशान करने वाले शत्रुओं को वश में करने का अच्छा और अचूक उपाय है।

मंत्रः नृसिंहाय विद्यहे, वज्र नखाय धी मही तन्नो नृसहिं प्रचोदयात!!

षड्यंत्रकारी शत्रु द्वारा रचे जाने वाले छल-प्रपंच का बचाव करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपाय मां काली की पूजा-आराधना और साधना से भी हासिल किया जा सकाता है। इससे दुश्मन को अपने वश में कर उसके नकारात्मक प्रभाव को हमेशा के लिए दूर किया जा सकता है। इस उपाय के अनुसार रविवार की अमावस्या की रात में के एक काले कपड़े पर महाकाली की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें। उसी पर पूजा के सामान को रखें और दक्षिण दिशा की ओर मुख कर पूजन आरंभ करें। यानि कि महाकाली की तस्वीर उत्तर दिशा की ओर होनी चाहिए।

सामान्य पूजा के बाद एक नींबू पर सिंदूर से शत्रु का नाम लिख दें। बची सिंदूर को सरसों या तिल के तेल में मिला दें और शत्रु व शत्रुता नाश का संकल्प लें। इसी के साथ काला हकिक या रुद्राक्ष या फिर मूंगे की माला से निम्न मंत्र का 11 माल जाप करें। हर माला जाप के बाद महाकाली के पास रखे निंबू पर उड़द के दाल चढ़ाएं और मन में यह भाव लाएं कि महाकाली द्वारा आपके शत्रु का विनाश हो रहा है। इस जाप का मंत्र हैः क्रीं शत्रु नाशिनी क्रीं फट!!

जाप पूरे होने के बाद एक मिट्टी की छोटी मटकी में नींबू को डाल दें। महाकाली की तस्वीर को हटाकर काले कपड़े से लोटे या मटकी का मुंह बांधकर मटकी को महाकाली मानते हुए एकबार फिर शत्रु नष्ट करने के लिए प्रार्थन करें। इस तरह से संपन्न होने वाले अनुष्ठान के बाद मटकी को किसी निर्जन स्थान पर जमीन में गाड़ दें। उसके बाद आप पाएंगे कि चंद समय बाद ही आपके शत्रु का आपके प्रति व्यवहार में परिवर्तन आ गया है।

भैरव अष्टमी से शत्रु नाशः शत्रु की बढ़ी हुई परेशान करने वाली हरकतों को भैरव अष्टमी से खत्म किया जा सकता हैं। भौरव मंदिर में इसे शत्रु मुक्ति के लिए किया जाता है। इसके लिए शत्रु का नाम एक छोटे से एक सफेद कागज पर भैरव मंत्र का जाप करते हुए लिखें। उसे एक शहद की शीशी में डुबोने के बाद ढक्कन बंद कर भैरव मंदिर या शनि मंदिर में गाड़ देने से न केवल शत्रु की उछल-कूद बंद हो जाती है, बल्कि उसे भी भारी क्षति होती है। इसके लिए उपयोग में आया मंत्र हैः-

ओम क्षौं भैरवाय स्वाहा!

इस उपाय को भैरव अष्टमी के अतिरिक्त कृष्ण पक्ष द्वितीया को पड़ने वाले गुरुवार या शनिवार को किया जा सकता है।

भैरो मंत्र के उपायः शत्रु का नाश करना हो या फिर अपनी सुरक्षा पुख्ता करनी हो, उसके लिए श्री वीर भैरो मंत्र बहुत उपयोगी साबित हो सकते हैं। यहां शत्रु नाश से मतलब किसी की शत्रुता के खात्मे से है। इसके लिए मंगलवार या शनिवार को किए जाने वाले उपाय के तहत सवा किलोग्राम बूंदी के लड्डु, नारियल, अगरबत्ती और लाल फूल की माल से श्रीवीर अर्थात हनुमान की पूजा करें। उसके बाद नीचे दिए गए मंत्र का सात बार जाप का पूजा करें। इस सात मंगलवार या शनिवार को करने से लाभ मिलता है।

शत्रु वशीकरण मंत्रः हमें जो सतावे, सुख न पावे सातो जनम,

ठतनी अर्ज सुन लीजे, वीर भैरा, आज तुम।

जितने हाए शत्रु मेरे, और जो सत�

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