Manpasand Shadi Karne Ke Upay

Manpasand Shadi Karne Ke Upay , ” Yadi Aap Kisi Se Prem Karte Hai Aur Us Ke Saath Saat Pheron Mein Bandhkar Apna Jeevan Bitaana Chaahate Hai, Parantu Paarivaarik, Dhaarmik, Saamaajik Ya Aarthik Aadi Prakaar Ke Gatirodh Baadhak Ban Rahen Hai ? Aisi Sthiti Mein Is Prakaar Ke Upaay Bataaye Ja Rahen Hai, Jinhe Apanaakar Aap-Apni Manpasand Ladki Se Vivaah Karne Mein Saphal Honge.

विवाह योग्य उम्र होते ही युवाओं का मन विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित होने लगता है। मन चंचल होता है, इसलिए इसे काबू में रख पाना युवा उम्र में थोड़ा मुश्किल होता है। आंखे हर अच्छी चीज के प्रति आकर्षित होती है। लेकिन आंखों के रास्ते से जो चीज दिल में उतर जाती है उससे प्रेम हो जाता है।

प्रेम की शुरूआत आकर्षण से होती है, किन्तु आकर्षण जब समर्पण का रूप धारण कर लें तब परिणय सूत्र में बंधना लाजिमी हो जाता है। जब तक जाति, धर्म व परम्परायें रूढि़वादिता की जंजीरों में जकड़ी है तब-तक कोई प्रेम क्यों करेगा और करेगा भी तो समाज की वक्र दृष्टि से अछूता नहीं रह पायेगा।

Manpasand Shadi Karne Ke Upay

आप अपने मनपसंद साथी के साथ विवाह बंधन में बंधना चाह रहे हैं और तमाम मुश्किलें आपके सामने खड़ी हैं तो अपनाइए कुछ खास उपाय। इन उपायों से आप अपने वेलेंटाइन के साथ बिना किसी बाधा के शादी के बंधन में बंध सकेंगे। ‍नीचे दिए गए मंत्रों को इच्छुक लड़की 91 दिन घी का दीपक लगाकर जप करें। दुर्गा जी का ध्यान कर 5 माला प्रतिदिन जपें। मां भगवती के आशीर्वाद से आपका अपने वेलेंटाइन से शीघ्र विवाह हो जाएगा।

मंत्र :

1- हे देवि कात्यायनी यथा त्वं शंकरप्रिया।
तथा माम कुरु कल्याणी, कान्त कान्तां सुदुर्लभाम।।

2- कात्यायनी महामाया, महायोगीन्यधीश्वरी
नंद गोप सुतं देहि पति में कुरु ते नम:।।

दूसरा उपाय : शनिवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करें। सरसों या तिल्ली के तेल का ही दीपक लगाएं।

तीसरा उपाय : माह की प्रत्येक प्रदोष तिथि को मां पार्वती का श्रृंगार कर विधिवत पूजन करें। तीन रत्ती से अधिक का जरकन, हीरे या पुखराज की अंगूठी अनामिका में शुभ मुहूर्त में विधिवत धारण करें।

मां पार्वती की विधिवत पूजा करके प्रतिदिन मंत्र की पांच माला का जाप करने पर मनोरथ शीघ्र पूर्ण होता है।
कात्यायनी महामाया, महायोगीन्यधीश्वरी नंद गोप सुतं देहि पति में कुरु ते नम:।।

चौथा उपाय : विवाह के लिए गुरु आराध्य है तथा प्रेम के लिए मंगल और शुक्र को मनाएं।